देवभूमि में ढोंगियों की अब खैर नहीं: नैनीताल पुलिस का “ऑपरेशन कालनेमि” शुरू

रामायण के ‘कालनेमि’ से प्रेरित पुलिस का मिशन।

उत्तराखंड,हिंदी न्यूज़ जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, में धार्मिक आस्था और सनातन संस्कृति की पवित्रता को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने एक विशेष अभियान, “ऑपरेशन कालनेमि”, शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य समाज में अंधविश्वास, ढोंग, और धर्म की आड़ में ठगी करने वाले फर्जी बाबाओं और छद्म साधु-संतों पर नकेल कसना है। नैनीताल जिले में इस अभियान को युद्ध स्तर पर लागू किया जा रहा है, और इसके तहत पुलिस ने कठोर कार्रवाई करते हुए 24 फर्जी बाबाओं को चिन्हित किया है, जिनमें से 09 के खिलाफ पुलिस अधिनियम के तहत चालानी कार्यवाही की गई है।

“ऑपरेशन कालनेमि” उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शुरू किया गया एक विशेष अभियान है। इसका नाम रामायण के मायावी राक्षस कालनेमि से प्रेरित है, जो छल और प्रपंच का प्रतीक था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन असामाजिक तत्वों को पकड़ना और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करना है, जो साधु-संतों का भेष धारण कर लोगों की धार्मिक भावनाओं का शोषण करते हैं, खासकर महिलाओं और युवाओं को झूठे तंत्र-मंत्र, वशीकरण, और चमत्कारी उपायों के नाम पर ठगते हैं। यह अभियान न केवल धार्मिक ठगी को रोकने के लिए है, बल्कि सनातन धर्म और देवभूमि की पवित्रता को बनाए रखने का भी एक मजबूत कदम है।

नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने इस अभियान को गंभीरता से लागू करने के लिए सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना प्रभारियों, और चौकी प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उनके नेतृत्व में नैनीताल पुलिस ने जिले भर में चप्पा-चप्पा सर्च अभियान चलाया, जिसमें मंदिरों, आश्रमों, डेरों, और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर संदिग्ध व्यक्तियों की गहन जांच की गई। इस दौरान पुलिस ने दस्तावेजों का सत्यापन किया और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त लोगों की पहचान की।

नैनीताल जिले के विभिन्न क्षेत्रों में की गई कार्रवाई के परिणामस्वरूप,काठगोदाम पुलिस ने 03 संदिग्ध बाबाओं को चिन्हित किया, जिनमें से 01 के खिलाफ कार्रवाई की गई। मुखानी क्षेत्र में 01 व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई।कालाढूंगी क्षेत्र में 04 लोगों को चिन्हित किया गया, जिनमें से 02 के खिलाफ कार्रवाई हुई। लालकुआं क्षेत्र में 07 लोगों को चिन्हित किया गया, जिनमें से 02 के खिलाफ कार्रवाई की गई। रामनगर क्षेत्र में 10 लोगों को चिन्हित किया गया, जिनमें से 03 के खिलाफ पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

कुल मिलाकर, नैनीताल पुलिस ने 24 फर्जी बाबाओं को चिन्हित किया और 09 के खिलाफ पुलिस अधिनियम के तहत चालानी कार्यवाही की। इन व्यक्तियों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वे भविष्य में ऐसी गतिविधियों से दूर रहें, अन्यथा और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

“ऑपरेशन कालनेमि” के तहत नैनीताल पुलिस की यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और धार्मिक स्थलों, मंदिर परिसरों, आश्रमों, और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। पुलिस द्वारा बरामद सामग्री, जैसे नकली ताबीज और अन्य वस्तुएं, इस बात का प्रमाण हैं कि ये फर्जी बाबा लोगों को ठगने के लिए सुनियोजित तरीके से काम कर रहे थे।

नैनीताल पुलिस ने यह भी बताया कि कई चिन्हित व्यक्तियों के दस्तावेजों की जांच में उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी सामने आई है। कुछ बाहरी राज्यों और यहां तक कि विदेशों से आए व्यक्तियों ने भी धार्मिक भेष में ठगी की गतिविधियों को अंजाम दिया था। इस तरह की कार्रवाइयों से न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया जा रहा है।

नैनीताल पुलिस ने जनसामान्य से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, ढोंग, या ठगी की घटना की तत्काल सूचना स्थानीय पुलिस को दें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। धर्म की आड़ में ठगी और शोषण की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

जनता से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे तंत्र-मंत्र, वशीकरण, या चमत्कारी उपायों के झांसे में न आएं और अपनी व्यक्तिगत या पारिवारिक समस्याओं के समाधान के लिए केवल विश्वसनीय और वैध स्रोतों पर भरोसा करें। पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर और स्थानीय थानों के संपर्क विवरण साझा किए हैं, ताकि लोग आसानी से शिकायत दर्ज कर सकें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “ऑपरेशन कालनेमि” को सनातन धर्म और देवभूमि की पवित्रता को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड की सरल और निश्छल जनता की आस्था का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि देवभूमि में सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सद्भाव बना रहे।”

इस अभियान को लेकर हिंदू धार्मिक संगठनों, जैसे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा कि यह अभियान कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं को ठगी से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेष रूप से सावन माह में होने वाली कांवड़ यात्रा के दौरान फर्जी बाबाओं की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ये लोग श्रद्धालुओं को झूठे आशीर्वाद, ताबीज, और चमत्कारी उपायों का लालच देकर ठगी करते हैं। “ऑपरेशन कालनेमि” का समयबद्ध शुरू होना इस दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनकी आस्था की रक्षा सुनिश्चित करता है।

नैनीताल पुलिस का “ऑपरेशन कालनेमि” न केवल फर्जी बाबाओं और ठगी करने वालों के खिलाफ एक कड़ा कदम है, बल्कि यह समाज में जागरूकता फैलाने और औधार्मिक आस्था की पवित्रता को बनाए रखने का भी एक प्रयास है। 24 संदिग्धों को चिन्हित कर 09 के खिलाफ की गई चालानी कार्यवाही इस अभियान की गंभीरता का पता चलता है।नैनीताल पुलिस और उत्तराखंड सरकार का यह संदेश स्पष्ट है: धर्म की आड़ में ठगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और देवभूमि की पवित्रता हर हाल में बरकरार रहेगी।

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