मालधन में पेपर लीक को लेकर युवाओं और महिलाओं का उग्र प्रदर्शन, सीबीआई जांच की मांग।

मालधन, रामनगर।हिंदी न्यूज़ ,शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर 21 सितंबर को उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएस) द्वारा आयोजित परीक्षा में कथित पेपर लीक की घटना ने स्थानीय युवाओं और महिलाओं में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। रविवार को मालधन पुलिस चौकी से शुरू हुए एक बड़े जुलूस में सैकड़ों छात्र, युवा और महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने इस घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने और रोजगार को मौलिक अधिकार घोषित करने की जोरदार मांग की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन की शुरुआत मालधन पुलिस चौकी से हुई, जहां बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं एकत्र हुए। उन्होंने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर जुलूस निकाला, जिसमें ‘पेपर लीक बंद करो’, ‘सीबीआई जांच कराओ’ और ‘रोजगार हमारा मौलिक अधिकार’ जैसे नारे गूंजते रहे। जुलूस शहर की मुख्य सड़कों से गुजरते हुए सरस्वती भवन पहुंचा, जहां एक सभा का आयोजन किया गया। सभा में वक्ताओं ने पेपर लीक की घटना को प्रदेश सरकार की विफलता का प्रतीक बताते हुए कड़ी आलोचना की।

सभा को संबोधित करते हुए छात्र नेता हरजीत ने कहा, “हमने दिन-रात मेहनत करके 21 सितंबर की परीक्षा दी थी। परीक्षा कक्ष से बाहर आते ही पता चला कि पेपर लीक हो गया है। यह न केवल हमारी मेहनत का अपमान है, बल्कि पूरे सिस्टम की सड़ांध को उजागर करता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में परीक्षा पेपर 15 लाख रुपये में बेचे जा रहे हैं और इस घोटाले में मंत्री से लेकर सरकारी अधिकारी तक सभी शामिल हैं। हरजीत ने दावा किया कि यदि सीबीआई जांच हुई तो भाजपा सरकार गिर जाएगी, यही वजह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जांच से बच रहे हैं।

अन्य वक्ता सुमन ने देश में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “21 सितंबर को 416 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में एक लाख से अधिक युवा शामिल हुए थे। यदि पेपर लीक नहीं होता, तब भी 99.5 प्रतिशत युवा बेरोजगार रह जाते। यह स्थिति देश की युवा शक्ति का अपमान है।” वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों पर भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। गौरव टम्टा ने कहा, “गृहमंत्री का बेटा क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष है, ट्रांसपोर्ट मंत्री के बेटे एक्सपोर्टर हैं, पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी विधानसभा अध्यक्ष है, लेकिन आम आदमी के बच्चे रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इस असमानता को खत्म करने के लिए संविधान में संशोधन कर रोजगार को मौलिक अधिकार घोषित किया जाना चाहिए, ताकि हर नागरिक को सम्मानजनक रोजगार की गारंटी मिले।

महिला एकता मंच की ललिता रावत ने महिलाओं की स्थिति पर जोर देते हुए कहा, “महिलाएं भी इस बेरोजगारी से बुरी तरह प्रभावित हैं। हमें न केवल रोजगार चाहिए, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक कामकाजी माहौल भी। सरकार की नीतियां युवाओं को निराशा की ओर धकेल रही हैं।” समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार ने आंदोलन को और व्यापक बनाने की अपील की। उन्होंने कहा, “यदि सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं देगी, तो हम पूरे प्रदेश में आंदोलन छेड़ेंगे।”

सभा में प्रगतिशील महिला एकता मंच की तुलसी छिम्वाल, परिवर्तन पार्टी के प्रभात ध्यानी, आनंद आर्य, इंद्रजीत, क्षेत्र पंचायत सदस्य पुष्पा आर्य, ग्राम प्रधान पुष्पा चंदोला समेत कई अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग की और युवाओं की मेहनत को व्यर्थ न जाने देने की अपील की।

यह प्रदर्शन उत्तराखंड में बढ़ते पेपर लीक मामलों की एक और कड़ी है, जो युवाओं की निराशा को दर्शाता है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की थी, और कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।

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