हल्द्वानी/रामनगर,हिंदी न्यूज बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने, सभी वन ग्रामों व गोठ-खत्तों को राजस्व ग्राम घोषित करने, हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर के उल्लंघन के दोषियों पर कार्रवाई तथा बेदखल किए गए ग्रामीणों के पुनर्वास की मांग को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति ने आगामी 4 जनवरी 2026 को रामनगर में आहूत जन सम्मेलन को सफल बनाने के लिए जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में ग्राम सुंदरखाल में एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।

जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वन ग्रामों के नाम पर केवल घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। उन्होंने सांसद अनिल बलूनी द्वारा वन ग्रामों को बिजली, पानी और मूलभूत सुविधाएं देने के वादे को जनता के साथ विश्वासघात बताया। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि जनप्रतिनिधि वास्तव में वन ग्रामों के हितैषी हैं, तो उन्हें सबसे पहले पूछड़ी गांव से विस्थापित 90 परिवारों का तत्काल पुनर्वास कराना चाहिए।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि 7 दिसंबर को पूछड़ी गांव में हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर का उल्लंघन कर कार्रवाई की गई, जो न्यायपालिका की अवमानना है। इसके लिए डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य सहित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के वन भूमि से अतिक्रमण हटाने संबंधी आदेश की आड़ में उत्तराखंड में लाखों लोगों को बेदखली के संकट में धकेला जा रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड का कुल क्षेत्रफल लगभग 53 हजार वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से 71 प्रतिशत क्षेत्र वन भूमि है। इस विशाल वन क्षेत्र में से मात्र 104 वर्ग किलोमीटर भूमि पर ही लोग निवास कर रहे हैं, जो कुल वन भूमि का एक प्रतिशत से भी कम (लगभग 0.28 प्रतिशत) है। इसके बावजूद इन्हीं लोगों को अतिक्रमणकारी बताकर हटाने की कोशिश की जा रही है।
वक्ताओं का कहना था कि दशकों से इन क्षेत्रों में बसे लोगों ने न केवल जंगलों की रक्षा की है, बल्कि उन्हें संवारा और बचाया भी है। आज वही लोग सरकार की नीतियों के कारण उजड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार वनवासियों को बेदखल करने की साजिश कर रही है।
जनसभा में यह मांग प्रमुखता से उठाई गई कि उत्तराखंड में जो भी व्यक्ति जहां वर्षों से निवास कर रहा है, उसे वहीं पर मालिकाना हक दिया जाए, और किसी भी व्यक्ति को बेदखल करने से पहले उसका पूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
संयुक्त संघर्ष समिति ने घोषणा की कि 4 जनवरी को रामनगर में होने वाले जन सम्मेलन में देश के जाने-माने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रवीन्द्र गड़िया, वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के तरुण जोशी, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, उपपा नेता पीसी तिवारी, किसान नेता अवतार सिंह सहित उत्तराखंड के कई प्रमुख सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के नेता भाग लेंगे।
सभा को खीमराम, प्रेम राम, पूरन चंद्र, प्रभात ध्यानी, कौशल्या, रोहित रुहेला, आशा, तुलसी छिंबाल, दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कमलेश कुमार, मुनीष कुमार सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन शेखर ने किया।
संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने जनभावनाओं की अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से 4 जनवरी को रामनगर पहुंचकर जन सम्मेलन को सफल बनाने की अपील की।
