नैनीताल, हिंदी न्यूज उत्तराखंड के रामनगर में महिला एकता मंच ने अंकिता भण्डारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक जोरदार जुलूस निकाला और लखनपुर चौक पर सभा आयोजित की। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा सरकार पर मामले को दबाने और कथित वीआईपी की रक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया। यह प्रदर्शन हाल ही में वायरल हुई उर्मिला सनावर की वीडियो के बाद सामने आए नए खुलासों से प्रेरित था, जिसमें पूर्व भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम उर्फ ‘गट्टू’ का नाम एक वीआईपी के रूप में उजागर किया गया है।

सभा का संचालन करते हुए महिला एकता मंच की नेता कौशल्या चुनियाल ने कहा कि उर्मिला सनावर की वीडियो में स्पष्ट रूप से ‘गट्टू’ का जिक्र है, जो अंकिता की हत्या के समय रिसॉर्ट से जुड़े थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता की हत्या के दिन उनकी लोकेशन टेलीफोन कॉल डिटेल्स से पता चल सकती है, लेकिन भाजपा सरकार उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। चुनियाल ने कहा, “बेशर्म भाजपा नेता उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय जन्मदिन की बधाई देकर देश की बेटी अंकिता का मजाक उड़ा रहे हैं।” उन्होंने एससी-एसटी आयोग पर भी निशाना साधा और कहा कि यह आयोग निष्पक्ष जांच करने की बजाय भाजपा नेताओं की कठपुतली बन चुका है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा को जातिवादी रंग देकर अपराधियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि सल्ट निवासी जगदीश की हत्या के समय आयोग कहां था और दलितों को किराए पर कमरा न मिलने पर यह क्यों चुप रहता है।
महिला एकता मंच की संयोजिका ललिता रावत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘गट्टू’ का नाम सामने आने के बावजूद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूरी भाजपा मौन साधे हुए है। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत है और अगर भाजपा सरकार जनता की इच्छा के खिलाफ इस मामले को दबाने की कोशिश करेगी, तो महिलाएं काले झंडे दिखाकर विरोध करने से पीछे नहीं हटेंगी। रावत ने निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि अगर भाजपा सरकार बेटियों को सुरक्षा नहीं दे पा रही है, तो उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

सभा में उत्तराखंड महिला एकता मंच की नेता ऊषा पटवाल ने भाजपा के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नारे को पूरी तरह ढकोसला करार दिया। उन्होंने मांग की कि प्रदेश की भाजपा सरकार शीघ्र वीआईपी के नाम का खुलासा करे और अंकिता हत्याकांड से जुड़े सबूत मिटाने तथा उसके कमरे में बुलडोजर चलवाने के लिए जिम्मेदार भाजपा नेताओं व अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रभात ध्यानी, समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार, प्रगतिशील एकता मंच की तुलसी छिम्वाल, एडवोकेट पूरन चंद्र पांडेय, महिला एकता मंच की माया, करणी सेना के सूरज चौधरी आदि शामिल थे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में सीबीआई जांच की मांग दोहराई और कहा कि अंकिता जैसे मामलों में न्याय मिलना जरूरी है ताकि महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें।
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ जब अंकिता भण्डारी हत्याकांड फिर से सुर्खियों में है। 2022 में हुई इस हत्या में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य सहित तीन लोगों को मई 2025 में आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है, लेकिन हाल के वीडियो खुलासों ने मामले में कथित वीआईपी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। महिला एकता मंच की ओर से सरस्वती जोशी ने बताया कि यह प्रदर्शन महिलाओं की एकजुटता का प्रतीक है और न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।

प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और बड़ी संख्या में महिलाएं इसमें शामिल हुईं। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की। इस मामले में राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी तीखी हैं, लेकिन महिला एकता मंच ने स्पष्ट किया कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और केवल न्याय की मांग पर केंद्रित है।
