ज़िंदगी की जंग जीत गई 28 हफ्ते की नन्ही जान

‘1.2 किलो वज़न, न रोने की हालत… लेकिन चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी में इंसानियत ने रच दिया चमत्कार’

नैनीताल/हल्द्वानी।हिंदी न्यूज, कभी-कभी अस्पताल की दीवारों के भीतर सिर्फ इलाज नहीं होता, बल्कि उम्मीद, विश्वास और जीवन की वापसी भी जन्म लेती है। ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी में सामने आया, जहाँ मात्र 28 सप्ताह में जन्मे, 1.2 किलो वज़न वाले एक नवजात शिशु ने मौत से संघर्ष कर नई ज़िंदगी मे बदल दिया।

2 दिसंबर 2025 को जब यह नन्ही जान दुनिया में आई, तब न रोने की आवाज़ थी, न सांसों में ताक़त। माँ-बाप के चेहरे पर डर था और हर गुजरता पल किसी अनहोनी का संकेत दे रहा था। लेकिन डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। जन्म के तुरंत बाद बच्चे को आपात इलाज देते हुए NICU में भर्ती किया गया।

‘हर सांस एक संघर्ष, हर पल एक परीक्षा’

डॉक्टरों के अनुसार नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी। नवजात को गंभीर सांस संबंधी समस्या  संक्रमण,खून की कमी, दिमाग में हल्की ब्लीडिंग जैसी जटिल परेशानियाँ थीं। यह वह अवस्था थी, जहाँ ज़रा-सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती थी। लेकिन चंदन हॉस्पिटल की टीम ने इसे सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि एक जीवन की जिम्मेदारी समझा।

‘डॉक्टरों की मेहनत बनी जीवन की ढाल’

वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सुयाल एवं डॉ. पियूष कुमार के नेतृत्व में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम ने दिन-रात बच्चे की निगरानी की। आधुनिक तकनीक, सटीक दवाइयाँ और समय पर लिए गए फैसलों ने धीरे-धीरे हालात को बदलना शुरू किया।दिन बीतते गए और उम्मीद की लौ जलने लगी। वह बच्चा, जिसकी सांसें मशीनों पर टिकी थीं, आज वहखुद से सांस ले रहा है, माँ का दूध पी रहा है, पूरी तरह होश में है। रोकर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है डॉक्टरों के अनुसार बच्चा अब पूरी तरह स्थिर है और सुरक्षित रूप से उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

‘माता-पिता की टूटती उम्मीद फिर बनी ताक़त’

बच्चे के माता-पिता भावुक होकर कहते हैं।“हमने उम्मीद छोड़नी शुरू कर दी थी, लेकिन डॉक्टरों ने हर दिन हमें भरोसा दिया। चंदन हॉस्पिटल ने हमारे बच्चे को ही नहीं, हमें भी नई ज़िंदगी दी है।” उनकी आँखों में खुशी के आँसू और चेहरे पर सुकून इस बात का सबूत हैं कि इलाज सिर्फ दवाइयों से नहीं, संवेदनाओ और भरोसे से भी होता है।

‘कुमाऊँ के लिए भरोसे का नाम बना चंदन हॉस्पिटल’

चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी आज कुमाऊँ क्षेत्र के उन सैकड़ों परिवारों के लिए उम्मीद की रोशनी बन चुका है, जिनके नवजात असमय या गंभीर हालत में जन्म लेते हैं। यह सफलता यह साबित करती है कि बड़े शहरों तक सीमित मानी जाने वाली उन्नत नवजात चिकित्सा अब कुमाऊँ की धरती पर भी जीवन बचा रही है।

यह कहानी सिर्फ एक बच्चे के बचने की नहीं है,यह कहानी है ।डॉक्टरों के समर्पण की,माता-पिता के विश्वास की,और उस इंसानियत की,जो हर मुश्किल के आगे झुकने से इनकार कर देती है।

 

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