मालधन,हिंदी न्यूज़ उत्तराखंड में एक के बाद एक सामने आ रहे परीक्षा पेपर लीक घोटालों ने छात्रों और युवाओं के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर महिला एकता मंच ने आगामी 28 सितंबर को मालधन में जुलूस और प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया है। यह जुलूस मालधन नंबर 2 पुलिस चौकी के पास से सुबह 11 बजे शुरू होगा, जिसमें क्षेत्र के छात्रों, युवाओं, महिलाओं और आम जनता से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।

महिला एकता मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक मालधन में आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने भाजपा सरकार और नकल माफिया के गठजोड़ पर जमकर निशाना साधा। बैठक में उपस्थित महिला नेत्री विनीता टम्टा ने सभी नागरिकों से इस प्रदर्शन में शामिल होकर युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “यह समय जागने और एकजुट होने का है। हमारी युवा पीढ़ी का भविष्य दांव पर है, और हमें इसके लिए सड़कों पर उतरना होगा।”
,नकल माफिया और सरकार पर गंभीर आरोप,
बैठक में भगवती आर्य ने कहा कि उत्तराखंड में नकल माफिया और भाजपा सरकार का गठजोड़ अब खुलकर सामने आ चुका है। उन्होंने यू.के.एस.एस.एस.सी (उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) परीक्षा पेपर लीक कांड का जिक्र करते हुए कहा, “छात्र और युवा दिन-रात मेहनत करते हैं, कर्ज लेकर कोचिंग और परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन नकल माफिया लाखों रुपये लेकर पेपर लीक कर देते हैं। यह सरकार की नाकामी का जीता-जागता सबूत है।” भगवती ने आगे कहा कि सरकार इस माफिया को संरक्षण दे रही है, जिसके चलते प्रदेश के युवाओं का भविष्य अंधेरे में डूब रहा है।
“भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप”
महिला नेत्री सरस्वती जोशी ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा, “भाजपा के नेता और मंत्रियों के बच्चे सत्ता का दुरुपयोग कर ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं। कोई का बेटा क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष बन बैठा है, तो कोई निर्यातक बनकर मालामाल हो रहा है। लेकिन जिन गरीब और मेहनती परिवारों ने भाजपा को वोट दिया, उनके बच्चे बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।” उन्होंने इस अन्याय को खत्म करने और युवाओं के लिए न्याय की मांग की।
‘रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग”
बैठक में ममता आर्य ने सरकार से रोजगार को मौलिक अधिकार घोषित करने और सभी के लिए रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करने वाला कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, “युवाओं को रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है। अगर सरकार इस जिम्मेदारी को नहीं निभा सकती, तो उसे सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है।”
“नागरिकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील”
रेखा शाह ने सभी जागरूक नागरिकों से इस आंदोलन का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा, “आज हमारी जिम्मेदारी है कि हम सरकार के संरक्षण में हो रहे इस भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। यह सिर्फ छात्रों और युवाओं की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह हर उस व्यक्ति की लड़ाई है जो उत्तराखंड के बेहतर भविष्य की उम्मीद करता है।”
बैठक में महिला एकता मंच की कई प्रमुख नेत्रियां शामिल थीं, जिनमें देवी आर्य, ममता आर्य, रंजनी आर्य, कौशल्या चुनियाल, सरस्वती जोशी, रेखा शाह, भगवती आर्य, विनीता टम्टा और अन्य शामिल थीं। सभी ने एक स्वर में सरकार की नीतियों की आलोचना की और आगामी प्रदर्शन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
“28 सितंबर को जुलूस का आयोजन”
महिला एकता मंच ने स्पष्ट किया कि 28 सितंबर का जुलूस शांतिपूर्ण होगा और इसका उद्देश्य सरकार को युवाओं के भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाना है। मंच ने सभी सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों और नागरिकों से इस प्रदर्शन में शामिल होकर एकजुटता दिखाने का आह्वान किया है।
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। यू.के.एस.एस.एस.सी की हालिया परीक्षा में भी पेपर लीक का मामला उजागर हुआ है, जिसके बाद छात्रों और युवाओं में भारी आक्रोश है। इन घोटालों ने न केवल छात्रों का भरोसा तोड़ा है, बल्कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं।
महिला एकता मंच ने यह भी घोषणा की कि यह प्रदर्शन केवल शुरुआत है। अगर सरकार ने इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो मंच भविष्य में और बड़े आंदोलनों की योजना बनाएगा। मंच ने मांग की है कि पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाए जाएं।

