हल्द्वानी,हिंदी न्यूज 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना की ऐतिहासिक विजय के उपलक्ष्य में पूरे देश की तरह नैनीताल जिले में भी विजय दिवस बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जनपद नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने हल्द्वानी स्थित युद्ध स्मारक (शहीद पार्क) पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को सलामी दी। उन्होंने कहा कि विजय दिवस भारतीय सेना के वीर जवानों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और पराक्रम की पराकाष्ठा का प्रतीक है। 16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान को निर्णायक हराकर न केवल दुश्मन के इरादों को चकनाचूर किया, बल्कि पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराकर बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र का जन्म दिया। इस युद्ध में लगभग 3,900 भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी और 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया।

डॉ. मंजूनाथ ने कहा, “हमारे वीर योद्धाओं के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी शौर्य गाथा हमें प्रेरित करती है कि देश की सुरक्षा के लिए हर नागरिक को अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए। सरहदों पर तैनात हमारी डिफेंस फोर्सेस की मेहनत और परिश्रम से ही हम सुरक्षित हैं। हमें इतिहास से सीखते हुए देश के लिए जीना चाहिए।”

कार्यक्रम में सबसे पहले 1971 के युद्ध में शहीद सैनिकों को पुष्पचक्र अर्पित किया गया। पुलिस सम्मान गार्ड द्वारा शोक सलामी दी गई। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वीरांगनाओं और शहीद सैनिक आश्रितों को शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, महापौर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट, नगर आयुक्त परितोष वर्मा, पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी मनोज कुमार कत्याल, मेजर जनरल इन्द्रजीत सिंह बोरा (विशिष्ट सेवा मेडल), स्टेशन कमांडर के प्रतिनिधि कर्नल दीपक जोशी, कर्नल आलोक पाण्डे, ले. कर्नल बी.डी. काण्डपाल, ले. कर्नल बी.एस. रौतेला, पूर्व सैनिक लीग हल्द्वानी के अध्यक्ष ग्रुप कैप्टन सुरेन्द्र रावत, कर्नल रमेश सिंह, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी तथा शहीद सैनिक आश्रित श्रीमती सरस्वती देवी, श्रीमती नन्दा जोशी, श्रीमती पार्वती देवी और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।यह समारोह न केवल शहीदों के बलिदान को याद करने का अवसर था, बल्कि देशभक्ति और एकता का संदेश देने वाला भी रहा।
