बजट 2026: करदाताओं को तात्कालिक राहत नहीं, लेकिन भरोसे की नई बुनियाद

आयकर सुधारों पर केंद्रित रहा केंद्रीय बजट”

नई दिल्ली।हिंदी न्यूज। केंद्रीय बजट 2026 को यदि केवल टैक्स स्लैब के चश्मे से देखा जाए, तो आम करदाताओं को निराशा हाथ लगती है। इस बार भी आयकर की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे वेतनभोगी और मध्यम वर्ग को तत्काल राहत नहीं मिल सकी। लेकिन बजट की परतें खोलने पर तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है।यह बजट तात्कालिक लोकलुभावन फैसलों से अधिक, दीर्घकालिक और संरचनात्मक सुधारों की ओर इशारा करता है।

सबसे अहम घोषणा 1 अप्रैल 2026 से नए आयकर कानून के लागू होने की है। सरकार का दावा है कि नया कानून सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल होगा। मौजूदा जटिल धाराओं, व्याख्याओं और अस्पष्टताओं को हटाकर कर प्रणाली को “समझने योग्य” बनाने की कोशिश की जा रही है।

कर सलाहकार एवं अधिवक्ता मजहर अली के अनुसार,“इस बजट की सबसे बड़ी ताकत यह है कि सरकार ने ईमानदार करदाताओं को केंद्र में रखा है। अनावश्यक नोटिस, पेनल्टी और मुकदमों को कम करने पर दिया गया ज़ोर कर प्रशासन की सोच में बदलाव को दर्शाता है।”

बजट में यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि छोटे, तकनीकी या अनजाने में हुई गलतियों को अब अपराध की तरह नहीं देखा जाएगा। कठोर कार्रवाई से बचने की नीति करदाताओं और विभाग के बीच लंबे समय से चली आ रही अविश्वास की खाई को पाटने में सहायक हो सकती है।

पिछले कुछ वर्षों में आयकर नोटिस और जांच की प्रक्रिया को लेकर करदाताओं में भय का माहौल रहा है। बजट 2026 इस मानसिकता को बदलने की कोशिश करता दिखता है। सरकार का फोकस अब ‘कर संग्रह’ के साथ-साथ ‘करदाता अनुभव’ को बेहतर बनाने पर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए आयकर कानून को वास्तव में सरल भाषा और स्पष्ट नियमों के साथ लागू किया गया, तो यह न केवल अनुपालन बढ़ाएगा बल्कि स्वैच्छिक कर भुगतान को भी प्रोत्साहित करेगा।

कुल मिलाकर, बजट 2026 आयकर के मोर्चे पर किसी तत्काल तोहफे की तरह नहीं, बल्कि भविष्य की ठोस नींव की तरह सामने आता है। टैक्स स्लैब में बदलाव न होने से भले ही आम करदाता को निराशा हुई हो, लेकिन सिस्टम को सरल और भरोसेमंद बनाने की पहल लंबी दौड़ में बड़ा बदलाव ला सकती है।

जैसा कि अधिवक्ता मजहर अली कहते हैं,“यह बजट राहत का नहीं, सुधार का बजट है। असर तुरंत नहीं, लेकिन स्थायी होगा।”

 

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