जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित गर्भवती महिला की हाई-रिस्क डिलीवरी, डॉक्टरों की टीम ने बचाई माँ और नवजात की जान

नैनीताल/हल्द्वानी।हिंदी न्यूज। जन्मजात दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित एक गर्भवती महिला के लिए डिलीवरी किसी जानलेवा चुनौती से कम नहीं थी। हालत इतनी नाज़ुक थी कि शहर के कई अस्पतालों ने इलाज से साफ इनकार कर दिया। माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान पर हर पल खतरा मंडरा रहा था। ऐसे समय में चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी महिला और उसके परिवार के लिए आख़िरी उम्मीद बनकर सामने आया।

जानकारी के अनुसार, महिला के दिल का एक हिस्सा जन्म से ही ठीक तरह से काम नहीं कर रहा था। इस तरह की बीमारी में गर्भावस्था के अंतिम चरण और ऑपरेशन के दौरान दिल पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे हार्ट फेल, सांस रुकने और अचानक मौत तक का खतरा रहता है। इन्हीं आशंकाओं के चलते कई अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए।

चंदन हॉस्पिटल पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम ने महिला की हालत का बारीकी से मूल्यांकन किया। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अलका ने इसे अत्यंत हाई-रिस्क केस बताते हुए आपातकालीन ऑपरेशन का निर्णय लिया। डॉ. अलका ने बताया, “मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। दिल की जन्मजात बीमारी के कारण डिलीवरी के दौरान जान जाने का खतरा था, लेकिन समय पर सही फैसला और टीमवर्क से हम जोखिम उठाने को तैयार हुए, क्योंकि हमारे सामने एक नहीं, दो ज़िंदगियाँ थीं।”

इस ऑपरेशन में बेहोशी की प्रक्रिया सबसे संवेदनशील चरण थी।कार्डिएक एनेस्थेटिस्ट डॉ. रवि और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ.कौशल ने हर सेकंड पूरी सतर्कता के साथ काम किया।डॉ.रवि ने बताया,“ऐसे मरीज में एनेस्थीसिया की मात्रा थोड़ी भी ज़्यादा या कम हो जाए, तो दिल रुक सकता है। यह ऑपरेशन पूरी तरह टीम की एक-दूसरे पर भरोसे और अनुभव पर टिका था।”

ऑपरेशन के दौरान महिला की दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और हार्ट रिदम की लगातार निगरानी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव यादव करते रहे। और आगे डॉ. गौरव यादव ने  हमे बताया,“यह एक बेहद नाज़ुक स्थिति थी। हर पल हार्ट मॉनिटर पर नज़र रखनी पड़ रही थी, क्योंकि ज़रा-सी चूक जानलेवा हो सकती थी।”

ऑपरेशन के बाद महिला की हालत अचानक बिगड़ गई और दिल की धड़कन अनियंत्रित हो गई। ICU में हालात तनावपूर्ण हो गए, लेकिन डॉक्टरों की टीम ने हार नहीं मानी। डॉ. नितीश और डॉ. चारुल सहित क्रिटिकल केयर टीम ने लगातार निगरानी और उपचार जारी रखा।कई घंटों की मशक्कत के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ और आखिरकार माँ और नवजात दोनों सुरक्षित हो गए।

इस पूरे मामले ने यह साबित कर दिया कि चिकित्सा केवल तकनीक नहीं, बल्कि हिम्मत और इंसानियत का नाम भी है। जहाँ कई जगहों से निराशा मिली, वहीं चंदन हॉस्पिटल ने यह दिखाया कि जब इरादा मजबूत हो, तो सबसे कठिन चुनौती को भी मात दी जा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Call Now Button