नैनीताल/रामनगर।हिंन्दी न्यूज ।पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया इसे अदालत के आदेश की “जानबूझकर अवज्ञा” मानते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अवमानना कार्यवाही प्रारंभ कर दी है।
मामला पूछड़ी निवासी बालादत्त कांडपाल की भूमि से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, उनके विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 61A(1) के तहत बेदखली की कार्यवाही प्रारंभ की गई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिका (WPMS संख्या 583/2025) दायर की थी।न्यायालय ने 27 फरवरी 2025 को अंतरिम आदेश पारित करते हुए बेदखली की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद, याचिकाकर्ता की अधिवक्ता सुश्री तनुप्रिया जोशी ने न्यायालय को अवगत कराया कि स्थगन आदेश के बाद भी प्रतिवादी संख्या-1, डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने 24 दिसंबर 2025 को ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों के माध्यम से याचिकाकर्ता की भूमि पर कार्रवाई कर दी। आरोप है कि इस दौरान तैयार फसल और चारा नष्ट कर दिया गया तथा भूमि पर कब्जा कर लिया गया।
माननीय न्यायालय ने इसे गंभीर विषय मानते हुए डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें 18 मार्च 2026 को प्रातः 10:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उन्हें यह बताना होगा कि अदालती आदेशों के उल्लंघन के लिए उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।

इधर, संयुक्त संघर्ष समिति ने न्यायालय के रुख का स्वागत करते हुए कहा कि पूछड़ी में 7 दिसंबर को सैकड़ों ग्रामीणों के विरुद्ध की गई बेदखली कार्रवाई राजनीतिक दबाव में और गैरकानूनी तरीके से की गई थी। समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने कहा कि बेदखल किए गए सभी प्रभावित परिवारों का समुचित पुनर्वास किया जाना चाहिए।
पूछड़ी प्रकरण अब न्यायालय की निगरानी में है और आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
