नैनीताल पुलिस की अनोखी पहल – बच्चों को नशे से मुक्ति का संदेश, बुजुर्गों को सुरक्षा का सहारा

नशे और साइबर अपराध से बच्चों को बचाने के लिए स्कूलों में पहुँची पुलिस”

“अकेलेपन से जूझ रहे बुजुर्गों की चौखट पर पुलिस की दस्तक – दिलाया सहारा”

नैनीताल,हिंदी न्यूज़ ,समाज में बच्चों का भविष्य और बुजुर्गों का सहारा,ये दो सबसे संवेदनशील पहलू हैं। एक तरफ़ युवा पीढ़ी नशे और साइबर अपराध जैसी बुराइयों के खतरे से घिरी है, तो दूसरी तरफ़ अकेलेपन से जूझ रहे बुजुर्ग सुरक्षा और अपनत्व की तलाश में हैं। इन दोनों ही वर्गों तक पहुँचने के लिए नैनीताल पुलिस ने एसएसपी  प्रहलाद नारायण मीणा के निर्देशन में एक विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया। यह केवल पुलिस की ड्यूटी नहीं थी, बल्कि समाज को जोड़ने और भरोसा दिलाने का मानवीय प्रयास भी था।

नशा व साइबर अपराध पर प्रहार , बच्चों को मिली नई सीख”

पुलिस ने जनपद के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जाकर बच्चों और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों और साइबर अपराध से बचाव की जानकारी दी।

थाना बेतालघाट – थानाध्यक्ष श्री विजय नेगी की अगुवाई में पुलिस गाँव अमेल पहुँची। यहाँ ग्रामीणों को बताया गया कि नशा शरीर और दिमाग दोनों को खोखला कर देता है। इंटर कॉलेज बेतालघाट में छात्रों से कहा गया“जो नशे की ओर बढ़ता है, वह अपनी ज़िंदगी के सपनों से दूर हो जाता है।”

थाना मुखानी – थानाध्यक्ष श्री दिनेश जोशी और उ0नि0 नरेंद्र कुमार ने साईं कृपा एनजीओ के सहयोग से बच्चों को जागरूक किया। नुक्कड़ नाटक में जब कलाकारों ने नशे का खौफ़नाक रूप दिखाया, तो बच्चे चुपचाप सोच में डूब गए। कार्यक्रम खत्म होते ही कई बच्चों ने पुलिस से कहा“हम नशे को ना कहेंगे और दूसरों को भी समझाएँगे।”

♦थाना भवाली – प्रभारी निरीक्षक श्री प्रकाश मेहरा ने जी.बी. पंत इंटर कॉलेज खैरना और जी.आई.सी. भवाली में विद्यार्थियों को साइबर अपराध की चालाकियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा“ऑनलाइन दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।” साथ ही ट्रैफिक नियमों का पालन करने की शपथ भी दिलाई गई।

थाना मल्लीताल व मंगोली – स्कूलों में जाकर पुलिस ने छात्रों को नशे से दूर रहने के ठोस कारण बताए और साइबर क्राइम से बचने के सरल उपाय साझा किए। इन अभियानों में सबसे अहम बात यह रही कि बच्चे पुलिस को कठोर छवि में नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और मित्र की तरह देख पाए।

 “बुजुर्गों की चौखट पर दस्तक  “आप अकेले नहीं हैं”

अभियान का दूसरा पहलू बुजुर्गों की ओर था। आधुनिक समाज में एक बड़ी समस्या है कि बहुत से बुजुर्ग अकेलेपन से जूझ रहे हैं। उनके पास बात करने वाला, हाल-चाल पूछने वाला कोई नहीं होता। पुलिस जब उनके घर पहुँची तो उनके चेहरे पर जो सुकून आया, वह अमूल्य था।

थाना मल्लीताल – पुलिस टीम ने वरिष्ठ नागरिकों से मिलकर हालचाल जाना, मोबाइल नंबर दिए और आश्वासन दिया“आपको किसी भी परेशानी में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।”

थाना मुखानी – पुलिस टीम ने एकल बुजुर्गों से मुलाक़ात की। एक बुजुर्ग महिला की आँखों में आँसू छलक आए और उन्होंने कहा“आज बेटों-बेटियों जैसा सहारा पुलिस ने दिया।”

थाना भवाली और मंगोली – यहाँ पुलिस ने अकेले रहने वाले बुजुर्गों से मुलाक़ात की, उनकी परेशानियाँ सुनीं और साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए। कई बुजुर्गों ने महसूस किया कि पुलिस अब उनके परिवार जैसी बन गई है।

इस पूरे अभियान ने यह साबित किया कि पुलिस केवल अपराध रोकने या अपराधियों को पकड़ने की ताक़त नहीं है, बल्कि समाज में भरोसा, सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं की साथी भी है।

बच्चों ने स्कूलों में नशे और साइबर क्राइम से बचने की कसम खाई।बुजुर्गों ने राहत की साँस ली कि अब उनके पास एक मजबूत सहारा है।और समाज ने महसूस किया कि पुलिस वाक़ई “जनता की पुलिस” बन रही है।

एसएसपी नैनीताल  प्रहलाद नारायण मीणा के नेतृत्व में पुलिस की यह पहल बच्चों के भविष्य को बचाने और बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करने का बड़ा प्रयास है। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि “जन-जागरूकता और भरोसे” की ऐसी मिसाल है, जो समाज को नई दिशा देती है।

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